कभी कभी ऐसा लगता है जैसे जो कुछ भी जीवन में घटित हो रहा है वो सब पहले भी हो चुका है... ये दिन ये रात एक एक पल सबकुछ जाना पहचाना सा लगता है..... ऐसा लगता है मैंने इस जिंदगी को बहुत करीब से देखा है.... कोई बहुत पुराना रिश्ता हो जैसे जो रह रह कर अपनी पहचान कराने की कोशिश करता है...... कभी कभी ये तन्हाईयाँ ये खालीपन कुछ और ही एहसास कराते हैं.... लगता है जैसे इस दुनिया से परे कोई और भी दुनिया है.... जहाँ पर कोई अपना रहता है, जो मेरे दिल के बहुत करीब है..... वो मुझे पुकार रहा है, अपने पास आने को कह रहा है.... वो कौन है कैसा दिखता है मैं उसे नहीं जानता..... मैंने उसका चेहरा कभी नहीं देखा..... वो मुझे क्यों अपने पास बुलाता है मुझे नहीं पता.... लेकिन उसकी आवाज में एक चुम्बकीय आकर्षण है... एक अजीब सा अपनापन है.... उस आवाज को सुनकर में उसकी ओर खिंचा चला जाता हूँ..... मेरी सांसे फूलने लगी हैं, मैं पागल होकर पूरी ताकत से दौड़ रहा हूँ.... मेरा गला सूखने लगा है, मैं बस गिरने ही वाला हूँ.... आगे एक बड़ी सी दीवार नजर आ रही है.... चारों तरफ बस अँधेरा ही अँधेरा है.... भागते भागते रास्ता खत्म हो चूका है.... गहरा सन्नाटा है, मेरे आलावा यहाँ दूर दूर तक कोई जीव नजर नहीं आ रहा..... यहाँ चारों ओर कुछ धुआं सा उड़ता हुआ दिखाई दे रहा है.... कोई आवाज नहीं कोई आहट नहीं..........!
इतने मैं आँख खुल जाती है और मैं देखता हूँ कि पसीने से पूरा नहा चुका हूँ... रजाई हटाकर उठ बैठता हूँ और लाइट ओन करके एक गिलास पानी पीकर पास में राखी कुर्सी पे बैठ जाता हूँ... कुछ देर सोचने के बाद लाइट बंद करके फिर से सो जाता हूँ.........
इतने मैं आँख खुल जाती है और मैं देखता हूँ कि पसीने से पूरा नहा चुका हूँ... रजाई हटाकर उठ बैठता हूँ और लाइट ओन करके एक गिलास पानी पीकर पास में राखी कुर्सी पे बैठ जाता हूँ... कुछ देर सोचने के बाद लाइट बंद करके फिर से सो जाता हूँ.........
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