Saturday, 8 June 2019

कभी कभी ऐसा लगता है जैसे जो कुछ भी जीवन में घटित हो रहा है वो सब पहले भी हो चुका है... ये दिन ये रात एक एक पल सबकुछ जाना पहचाना सा लगता है..... ऐसा लगता है मैंने इस जिंदगी को बहुत करीब से देखा है.... कोई बहुत पुराना रिश्ता हो जैसे जो रह रह कर अपनी पहचान कराने की कोशिश करता है...... कभी कभी ये तन्हाईयाँ ये खालीपन कुछ और ही एहसास कराते हैं.... लगता है जैसे इस दुनिया से परे कोई और भी दुनिया है.... जहाँ पर कोई अपना रहता है, जो मेरे दिल के बहुत करीब है..... वो मुझे पुकार रहा है, अपने पास आने को कह रहा है.... वो कौन है कैसा दिखता है मैं उसे नहीं जानता..... मैंने उसका चेहरा कभी नहीं देखा..... वो मुझे क्यों अपने पास बुलाता है मुझे नहीं पता.... लेकिन उसकी आवाज में एक चुम्बकीय आकर्षण है... एक अजीब सा अपनापन है.... उस आवाज को सुनकर में उसकी ओर खिंचा चला जाता हूँ..... मेरी सांसे फूलने लगी हैं, मैं पागल होकर पूरी ताकत से दौड़ रहा हूँ.... मेरा गला सूखने लगा है, मैं बस गिरने ही वाला हूँ.... आगे एक बड़ी सी दीवार नजर आ रही है.... चारों तरफ बस अँधेरा ही अँधेरा है.... भागते भागते रास्ता खत्म हो चूका है.... गहरा सन्नाटा है, मेरे आलावा यहाँ दूर दूर तक कोई जीव नजर नहीं आ रहा..... यहाँ चारों ओर कुछ धुआं सा उड़ता हुआ दिखाई दे रहा है.... कोई आवाज नहीं कोई आहट नहीं..........!

इतने मैं आँख खुल जाती है और मैं देखता हूँ कि पसीने से पूरा नहा चुका हूँ... रजाई हटाकर उठ बैठता हूँ और लाइट ओन करके एक गिलास पानी पीकर पास में राखी कुर्सी पे बैठ जाता हूँ... कुछ देर सोचने के बाद लाइट बंद करके फिर से सो जाता हूँ.........

अधूरी कहानी

बहुत खूबसूरत थी वो.... गोरी तो थी है लेकिन उसकी चाल भी किसी मॉडल से कम नहीं थी.....चेहरा इतना खूबसूरत कि सुबह सुबह देख लो तो पूरा दिन बन जाये.... एकदम बार्बी डॉल के जैसी लगती थी.....उसे सजने संवरने, नए नए कपडे पहनने का बहुत शौक था.... मैं नया नया उसके पड़ोस में रहने आया था....मैं तीसरी मंजिल पर बालकनी में खड़ा रहता और वो बार बार झाड़ू लगाने आती..... वो थोडा सा झुकी हुई होती, उसके एक हाथ में झाड़ू.... दूसरा सीने पर , और गर्दन ऑटोमैटिक तिरछी होकर सीधा बालकनी की तरफ पहुँच जाती..... जैसे ही नजरें मिलती बस मुस्कुरा देती और शर्मा के नीचे देखने लगती.... मैं भी उसकी तरफ अट्रैक्ट हो रहा था....
कुछ दिन ऐसा ही चलता रहा.... फिर मैं भी नीचे गली में खड़ा होने लगा.... वो सामने से आ रही थी.... मैं बस उसको देखे जा रहा था और वो पास आकर बोली
" ऐसे क्या देखते हो कभी देखा नहीं है क्या??"
मगर मेरे मुँह से कुछ नहीं निकला, बस चुपचाप उसको देखता रहा.... उसन बहुत सारे मौके दिए बात करने के, मिलने के..... मगर में डरता रहा , शर्माता रहा.... मन ही मन मुस्कुराता, हर पल हर वक़्त उसके ही बारे में सोचता, उसके ख्वाब देखता.... मगर उससे कभी बात नहीं कर पाया......
फिर कुछ दिनों बाद उसका 10th का रिजल्ट आ गया, पता चला कि वो फ़ैल हो गई..... फिर उसके बाद मैंने कभी उसकी तरफ नहीं देखा.... और यहीं इस लव स्टोरी का the end हो गया!!!!!!!. !
 अब मैं वो जगह छोड़ चूका हूँ, वो भी वहां से अपना मकान बेचकर जा चुकी है ....